Friday, November 15, 2019

कालाजार उन्मूलन साहेबगंज झारखण्ड

कालाजार यानी काला बुखार से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए 6000 रुपए सरकारी सुबिधा मिलेगा। इसके तहत मरीजों को मुफ्त चिकित्सा और दवाएं मुहैया करायी जाएंगी। साथ ही उन्हें प्रतिदिन 200 रुपए के हिसाब से एक महीने तक सहायता राशि यानी कुल छह हजार रुपए दी जाएगी। कालाजार के मरीज को अस्पताल तक लाने वाले व्यक्ति को भी 500 रुपए सम्मान की राशि के रूप में दी जाएगी। राज्य में फैल रहे कालाजार को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। अभी दुमका, गोड्‌डा, साहेबगंज और पाकुड़ में कालाजार के मरीज पाए जा रहे हैं।


कालाजार क्या है?
कालाजार एक संक्रमण बीमारी है जो परजीवी लिश्मैनिया डोनोवानी के कारण होता है।
कालाजार का परजीवी बालू मक्खी के द्वारा फैलता है।
इस परजीवी का जीवन चक्र मनुष्य और बालू मक्खी के ऊपर निर्भर करता है। यह परजीवी अपने जीवन का ज्यादातर समय मनुष्यों के शरीर में रहकर बिताता है।
बालू मक्खी कम रौशनी वाली और नम जगहों- जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों, चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है।
कालाजार क्या है?
कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार की गंभीरता चरणबद्ध तरीके से बढ़ती है और अगर इसका उपचार न कराया जाए तो यह जानलेवा बीमारी बन सकती है।
कालाजार किस परजीवी के कारण होता है?
यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के द्वारा होती है। इसका जीवन चक्र मनुष्यों और बालू मक्खी पर निर्भर करता है। यह परजीवी मनुष्यों के शरीर तथा वाहक बालू मक्खी में ही जीवित रहता है।

कालाजार का संक्रमण कैसे होता है?
कालाजार का संक्रमण बालू मक्खी द्वारा होता है। यह कालाजार को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलती है।
कालाजार कितने प्रकार का होता है?
कालाजार के फैलने के तरीके के आधार पर, कालाजार दो प्रकार का होता है:
जुनोटिक कालाजार: जहाँ कालाजार, परजीवी जानवरों से बालू मक्खी से मनुष्यों में संचारित होता है। भारत में इस प्रकार का कालाजार नहीं पाया जाता।

एंथ्रोपोनोटिक कालाजार: जहाँ कालाजार परजीवी मनुष्यों से बालू मक्खी में और पुनः मनुष्य में संचारित होता है।

परजीवी एक ऐसा जीव है जो दूसरे जीवों के शरीर में रहता है और उनसे पोषण लेता है। कुछ विशेष प्रकार के परजीवी मनुष्यों में बीमारी कर सकते हैं।
याद रखें

कालाजार परजीवी का जीवन चक्र मनुष्यों और वाहक बालू मक्खी पर ही निर्भर करता है।

भारत में किस प्रकार का  पाया जाता है?
भारत एंथ्रोपोनोटिक प्रकार का कालाजार, पोस्ट कालाजार डरमल लिशमैनियासिस (पीलकलडीलएल.) टी.बी. के साथ कालाजार और एचआईबी के साथ कालाजार पाया जाता है।
बालू मक्खी कहाँ पैदा होती है?
बालू मक्खी के पनपने के लिए अधिक नमी, गर्मतापमान, जमीन में जैविक पदार्थ और ऊँचा जल स्तर जरूरी है।
बालू मक्खी कम रोशनी वाली और म जगहों- जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों, चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है।
इस मक्खी की विशेषताएँ क्या है?
यह मक्खी उड़ने में कमजोर जीव है जो केवल जमीन से 6 फुट की ऊंचाई तक ही फुदक सकती है। यह आमतौर पर फुदकती है।
मादा बालू मक्खी ऐसे स्थानों पर अंडे देती है जो छायादार, नम तथा जैविक पदार्थों से परिपूर्ण हो।
इनके जीवित रहने की अवधि सामान्यतः 16-20 दिन ही होती है।
जिन घरों में बालू मक्खियाँ पाई जाती है, उन घरों में कालाजार के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
याद रखें

बालू मक्खी कम रोशनी वाली और नम जगहों- जिअसे कि मिट्टी की दीवारों के दरारों चूहों के बिलों तथा कम मिट्टी जिसमें बहुत से जैविक तत्व और उच्च भूमिगत जल स्तर हो, आदि में पनपती है।

कालाजार के लक्षण
यदि किसी व्यक्ति को दो हप्ते से ज्यादा से बुखार हो, उसकी तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो और उपचार से ठीक न हो हो तो उसे कालाजार हो सकता है।
पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस (पी.के.डी.एल.) एक त्वचा रोग है जो कालाजार में बाद होता है।
कालाजार के मुख्य लक्षण क्या है?
कालाजार के लक्षण है- दो हप्ते से ज्यादा समय से बुखार, खून की कमी (एनीमिया) , जिगर और तिल्ल्ली का बढ़ता, भूख न लगना, कमजोरी तथा वजन में कमी होना है।
सूखी, पतली, परतदार त्वचा तथा बालों का झड़ना भी इसके कुछ लक्षण है। उपचार में विलंब से हाथ, पैर और पेट की त्वचा भी काली पड़ जाती है। इसी कारण इसे कालाजार के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है काला बुखार।
पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस (पी.के.डी.एल.) क्या है?
पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस (पी.के.डी.एल.) एक त्वचा रोग है जो कालाजार के बाद होता है। कालाजार के कुछ  रोगियों में बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी त्वचा पर अलग प्रकार और रूप के सफेद धब्बे या छोटी-छोटी गांठें बन जाती है। लिश्मेनिया डोनोवानी की उपस्थिति में मानव शरीर में होने वाले बदलाव  को पी.के.डी.एल. कहते हैं।
पी. के. डी. एल. की यह घटना समान्य रूप से कालाजार होने के एक, दो या काई सालों बाद दिखाई देती है।
इस बिमारी के बहुत कम मामलों में यह त्वचा रोग कालाजार प्रारंभिक लक्षणों के बिना ही उजागार होते देखा गया है।
पी. के. डी. एल. के मामलों को कैसे पहचाना जाएं?




कोई भी व्यक्ति जिसे पहले कालाजार हुआ हो और उसके शरीर के किसी भाग पर हल्के रंग के धब्बे या छोटी-छोटी गांठ दिखाई दें जिन्हें छूने पर महसूस हो, वह व्यक्ति पी. के. डी. एल का केस हो सकता अहि।
कालाजार का संदेह कब होता है?
कालाजार प्रभावित क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति २ सप्ताह से अधिक समय से बुखार से पीड़ित हो उसका जिगर और तिल्ली बढ़ गया हो तो उसे कालाजार हो सकता है।
कालाजार से पूरा शरीर कैसे प्रभावित होता है?
कालाजार उत्पन्न करनेवाले परजीवी के संक्रमण से रोगी के शरीर के रोगों से लड़ने की क्षमता घट जाती है जिसके कारण उसे दूसरे रोगों से संक्रमित होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
याद रखें

प्रभावित क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति जो दो हप्ते से ज्यादा समय से बुखार से पीड़ित हो, उसकी तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो उपचार से ठीक नहीं हो पा रहा हो तो उसे तुरंत कालाजार की जाँच करानी चाहिए।

शीघ्र जाँच और पूरा इलाज
कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी सहिया, नजदीकी सदर अस्पाताल उप-स्वास्थ्य केंद्र अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजना चाहिए।
एकमात्र मानव शरीर में ही इस परजीवी का संरक्षण होता है। यदि पूरा उपचार नहीं किया गया तो रोगी ही परजीवी को अपने शरीर में सुरक्षित रखता है।
ठीक हुए मामलों की निगरानी छः महीनों तक बहुत आवश्यक है क्योंकि कई उपचारित और ठीक हुए मामलों में पी.के. डी.एल. के लक्षण पैदा हो सकते हैं।
कालाजार के रोगी की पहचान कैसे की जाती है?
अप्रत्यक्ष रूपसे रोगी की पहचान इसके अंतर्गत रोगी के संबंध में किसी संस्था जैसे स्वस्थ केन्द्रों, दवाखाने, सदर अस्पाताल आदि की रिपोर्ट द्वारा पता चलता है।
सक्रिय रूप से रोगी की पहचान- इसके अंतर्गत प्रभावित क्षेत्र में जाकर कालाजार के ऐसे रोगियों की पहचान की जाती है जिनको दो सप्ताह से ज्यादा समय से बुखार है और मलेरिया एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक नहीं हो रहे हों।
कालाजार पखवाड़ा/कालाजार खोज कैंप क्या है?





कालाजार के छुपे हुए मामलों की पहचान के लिए घर-घर जाकर खोज की जाती है। इसका आयोजन कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत छिड़काव से पूर्व किया जाता है।
इसके अंतर्गत प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय गांवों का भ्रमण स्वास्थ्य कार्यकत्ताओ  द्वारा पखवाड़े और समय-समय पर कालाजार खोज कैंप लगकार किया जाता है, जिसमें या कार्यकर्त्ता समुदाय के सदस्यों से बातचीत करके कालाजार और पी. के.डी.एल. के संभावित मामलों को लक्षणों के आधार पर पहचान करते हैं।
ग्रामीण स्तर पर कालाजार पखवाड़े/कालाजार खोज कैंप के आयोजन में कौन शामिल होते है?
इसके आयोजन में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी,  के.टी. एस.MPW सहिया और सामुदायिक कार्यकर्त्ता शामिल रहते हैं।



याद रखें

कालाजार प्रभावित जिलों के प्रत्येक गाँव ( जहन इस बीमारी के फैलने की संभावना हो) में सक्रिय रूप से रोगी की खोज की जानी चाहिए।

कालाजार पखवाड़ा/कालाजार खोज कैंप में स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं द्वारा कौन-सी मुख्य गतिविधियां की जाती है?
आपसी बातचीत के द्वारा व्यवहार में बदलाव के लिए समुदाय को उपयुक्त संदेश देना।
रोगी की पहचान के लिए घर-घर जाना।
कालाजार के संभावित रोगियों के सन्दर्भ कार्ड देना।
परिभाषा के अनुसार गाँव में पाए गये सभी कालाजार तथा पी.के.डी.एल. के संभावित रोगियों की पहचान करना।
सहिया और स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता द्वारा प्राथमिक स्वास्स्थ  केंद्र.सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र संदर्भित किये गये कालाजार के संभावित रोगियों का फ़ॉलो-उप करना जिससे ऐसे मामलों की स्थिति की सही जानकारी प्राप्त हो जाएं।
दल द्वारा भ्रमण किये गए सभी घरों का विवरण भरना।
रिपोर्ट तैयार करना तथा क्षेत्रीय स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के पास जमा करना।
कालाजार पखवाड़ा/कालाजार खोज कैंप में व्यवहार परिवर्तन संचार से संबधित कौन-सी गतिविधियाँ की जाती है?
घर-घर जाकर मामलों की खोज करते समय कालाजार कार्यकर्त्ताओं को समुदाय के लोगों के साथ नजदीकी संपर्क बनाने का अवसर मिलता है। इस अवसर का उपयोग करते हुए समुदाय को, व्यवहार में बदलाव के संदेश दिए जाने चाहिए जिससे कार्यक्रम का लक्ष्य प्राप्त हो सके। कालाजार पखवाड़े या कालाजार खोज कैंप के दौरान संदेश देने के लिए संचार सामग्री का प्रयोग करते हुए समुदाय के साथ आपसी बाचीत ही सबसे उपयुक्त तरीका है।
कालाजार की पहचान कैसे की जाती है?
कालाजार की जाँच रैपिड ड़ायग्नोसिटिक टेस्ट  (आर.डी.टी.) द्वारा की जाती है। इसमें रोगी की ऊँगली में सुई चुभाकर खून का नमूना लिया जाता है।
आर.डी.टी. के लाभ क्या है?
ऊँगली से निकाले गये एक बूंद रक्त से ही परीक्षण किया जा सकता अहि।
यह त्वरित परीक्षण है और 10-12 मिनट में   ही इसके परिणाम भी प्राप्त हो जाते हैं।
प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन के द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इसका प्रयोग किया जा सकता है।
यह परीक्षण पी.के.डी.एल. के मामलों में भी असरदार है।
कायर्क्रम के अंतर्गत कालाजार के उपचार के लिए कौन सीविधि अपनाई जाती है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य निति के अनुसार कालाजार का उपचार अब मात्र एक ही दिन में संभव है।
यह उपचार सदर अस्पाताल और चुने हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध है। इस हेतु अब कालाजार (विसरल लिश्मैनियासिस एम्फोटेरिसिन बी (एल.ए.एम्.बी.) का व्यवहार होता है।
उपचार की यह नई विधि के केवल दो से ढाई घंटों की अवधि में पूरी हो जाती है।
ठीक हुए मामलों की लम्बे समय तक निगरानी करना क्यों आवश्यक है?
इस प्रकार के मामलों की लंबे समय तक निगरानी इसलिए आवश्यक है क्योंकि ठीक होने के बाद भी इन मामलों में पी.के.डी.एल. के लक्षण और संकेत विकसित होते देखे गये हैं और इनमें परजीवी अपना घर बना लेते हैं।
पी.के.डी.एल.का उपचार
पी.के.डी.एल. जिसे चमड़ी का कालाजार भी कहा जाता है, कालाजार का दूसरा स्वरुप है। ऐसे मरीज भी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुप्त में जाँच और उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
उपचार उपरान्त क्या करें?
इलाज के तीन या चार दिनों के बाद तक बुखार, भूख न लगने अथवा उल्टी होने की शिकायत हो सकती है, जो की समान्य है।
यदि इलाज के दो सप्ताह बाद तक भी बुखार  आ रहा हो तो स्वस्थ्य केंद्र या सदर अस्पाताल में पुनः सलाह लें।
याद रखें

मानव शरीर में ही कालाजार के परजीवी के का संरक्षण होता है। यदि पूर्ण उपचार नहीं किया गया तो रोगी का शरीर ही इस परजीवी का घर बन जाता है।

कालाजार नियंत्रणकालाजार का नियंत्रण कैसे करें
अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव कराएँ।


अपने आस-पास स्वच्छता रखें।
कालाजार का पूर्ण उपचार कराएँ।
कीटनाशक का छिड़काव (आई. आर.एस.) क्या है?
कालाजार को फैलाने वाली बालू मक्खी के नियंत्रण के लिए घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में सरकार द्वारा आयोजित दवा का छिडकाव ही कीटनाशक का छिड़काव कहलाता है।
कीटनाशक के छिड़काव के लिए जगह का चयन कैसे किया जाएँ?
सभी कालाजार वाले गाँव, जो अभी संक्रमण में ग्रस्त हैं या पिछले तीन सालों में संक्रमित रहे हैं, को कीटनाशकों के छिड़काव द्वारा वेक्टर (बालू मक्खी) मुक्त किया जाता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले गांवों को निम्नानुसार चिन्हित किया जाता अजता है-
जहाँ से पिछले 3 वर्षों में कोई भी कालाजार का मामला दर्ज किया गया हो।
जहाँ से छिड़काव कार्यक्रम के दौरान कालाजार का कोई मामला सामने आया हो।
जो कालाजार से मुक्त है, लेकिन खोज करने के उपरान्त कुछ मामले ऐसे पाए गये जिनकी कालाजार के परिभाषा के अनुसार पुष्टि हुई हो।
कीटनाशक का छिड़काव कैसे और कहाँ किया जाना चाहिए?
घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए।
बाहरी दीवारों पर छिड़काव की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
बथानों, कालाजार से संक्रमित और संदिग्ध घरों में प्राथमिकता का आधार पर छिडकाव करना चाहिए।
कीटनाशक के छिड़काव का असर कितने दिनों तक रहता है?
कीटनाशक का छिड़काव 10 हफ्तों तक प्रभावशाली रहता है।
कीटनाशक के छिड़काव क्यों किया जाना चाहिए?
कीटनाशक का छिड़काव बालू मक्खी की संख्या को कम करा है।
कीटनाशक के छिड़काव यदि सभी हिस्सों में नहीं किया गया हो तो बालू मक्खी बिना छिड़काव वाले सतह पर रह जायेगी और उसे कोई नुकसान नहीं होगा।
जब छिड़काव दल गाँव का दौरा करें तब समुदाय के लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जब छिड़काव दल गाँव का भ्रमण करें तो घर पर रहना चाहिए और उनके साथ सहयोग करना चाहिए।
छिड़काव से पहले सभी कमरों को खाली कर देना चाहिए।
खाद्य सामग्री को कीटनाशक से बचाकर रखना चाहिए।
छिड़काव के समय न कुछ खाना चाहिए और न ही कुछ खाना चाहिए और न ही धुम्रपान करना चाहिए।
याद रखें

कीटनाशक का छिड़काव का वर्ष में दो बार होना चाहिए, ओहला फरवरी/मार्च में, दूसरा माई/जून में, दूसरा मई/जून में  जब छिड़काव किया रहा हो, तक न तो कुछ खाना चाहिए और न ही धुम्रपान करना चाहिए।

छिड़काव पूरा होने के बाद क्या नहीं करना चाहिए?
छिड़काव चक्र के बाद 10 सप्ताह तक दीवारों पर लिपाई-पुताई (मिट्टी, चूना, पेंट इत्यादि) नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कीटनाशक का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
कीटनाशक का परिवहन, देखभाल और निपटान कैसे करें?
कीटनाशक को अच्छे से पैक और नामांकित करके ही भेजना चाहिए।
कीटनाशक को दूसरी चीजों तथा खाद्य पदार्थों के साथ नहीं भेजना चाहिए।
दिन एक आखिर में स्प्रेयर को धोकर पानी को लैट्रीन के गड्ढे या पीने के पानी के स्रोत से दूर एक नया गड्ढा खोदकर डालना चाहिए।
जितने कीटनाशक की जरूरत हो उतने का ही घोल बनाया जाए ताकि कीटनाशक बर्बाद न हो।
बचे हुए कीटनाशक को नदी, तालाब और पानी में कभी नहीं फेंकना चाहिए।
सभी खाली पैकेट को निपटान के लिए पर्यवेक्षक को लौटा देना चाहिए।
कीटनाशक के खाली कंटेनर का कभी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
कीटनाशक का घोल बनाने और छिड़काव के बाद हाथों को अच्छे से धोना चाहिए। अपने बचाव के लिए चश्मा, दस्ताना और एप्रन का प्रयोग करना चाहिए।
कीटनाशक के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। यदि त्वचा या आँखों में कित्त्नाश्क चला जाए तो आँखों को साफ पानी से पांच मिनट तक धोना चाहिए और त्वचा को साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए। यदि जलन नजाए तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
छिड़काव में कीटनाशक के प्रयोग से क्या कोई दुष्प्रभाव है?

कीटनाशक के सीधे सम्पर्क में आने से बचना चाहिए, और यदि आँखें और त्वचा कीटनाशक के सम्पर्क में आ जाए तो आँखों को साफ पानी से धोना चाहिए। फिर भी जलन बनी रहती है तो तत्काल डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
कालाजार के नियंत्रण में समुदाय क्या भूमिका निभा सकता है?
अपने क्षेत्र के वार्ड सदस्य से कीटनाशक के छिड़काव की प्रस्तावित तिथि के बारे में पता करें।
ग्राम पंचायत यह सुनिश्चित करे की गाँव के सभी घरों में कीटनाशक का छिड़काव हो गया है।
ग्राम सभा की बैठकों में कालाजार के मुद्दे और इसके नियंत्रण की रणनीतियों पर चर्चा की जानी चाहिए।
ग्राम स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति की प्रत्येक मासिक बैठक में भाग लें और कालाजार पर चर्चा करें।
क्षेत्र के उन लोगों को स्वयं परीक्षण कराने को प्रोत्साहित करना चाहिए जो कालाजार के लक्षणों से ग्रसित हैं।
अपने घर और उसके चारों तरफ की स्वच्छता सुनिश्चित करें और बालू मक्खी के पनपने को नियंत्रित करने के लिए कित्त्नाश्क का छिडकाव कराएँ।
कालाजार के लिए क्या है उपलब्ध सरकारी सेवाएं ?
कालाजार की जांच और उपचार की सेवायें दरकार के सभी सदर अस्पताल और चुने हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त उपलब्ध हैं।
मनुष्यों में रहने वाले सभी घरों के भीतरी दीवारों तथा बथानों में कीटनाशकों का छिड़काव।
कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के उद्देश्य क्या है?
कालाजार के प्रभाव क्षेत्र में रहने वाली आबादी और उपेक्षित समुदायों में इसकी घटनाओं को न्यूनतम करना।
कालाजार से होने वाली मृत्यु को न्यूनतम करना।
पी. के. डी. एल. के उपचार से परजीवी संग्रह को न्यूनतम करना ।
कालाजार का उपचार और रोकथाम।
कालाजार का उन्मूलन कैसे किया जा सकता है?
परजीवी, परजीवी के वाहक और मनुष्य के बीच के चलने वाले चक्र तोड़कर कालाजार का उन्मूलन किया जा सकता है। जब परजीवी मनुष्य के शरीर के अदंर लम्बे समय तक के लिए रहता है तो इसके उन्मूलन के लिए पूर्ण उपचार आवश्यक है।
कालाजार का उन्मूलन के लिए क्या रणनीतियां है?उन्मूलन के लिए प्रभावी रणनीतियाँ
मजबूत निगरानी।
जोखिम वाले स्थानों में सक्रिय रूप से कालाजार के मामलों का पता लगाना।
कालाजार के गंभीर रोग घोषित करना।
निगरानी में कीटनाशक का प्रभावी छिड़काव करवाना।
समुदाय को प्रेरित करने के लिए प्रभावी व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान चलाना।
प्रशिक्षणों के माध्यम से प्रभावशाली मानव संसाधन का विकास करना।
अन्य स्वास्थ्य देखभाल करने वाले सामुदायिक/व्यक्तिगत सेवादाताओं के साथ तालमेल बनाना।
सरकार द्वारा क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है?
कालाजार के मामलों की सक्रिय पहचान के लिए वर्ष में 4 बार कालाजार पखवाड़ा आयोजित किया जाता है।
कालाजार की जांच एवं उपचार, सरकार के सभी सदर अस्पताल और चुने हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बिल्कुल मुप्त उपलब्ध है।
उन सभी ग्रामों में जहाँ कालाजार के मामले पाए गये हैं वहां बालू मक्खी की संख्या कम करने के लिए सरकार द्वारा कीटनाशक का छिड़काव कराया जाता अहि।
इलाज के दौरान कालाजार रोगी को श्रम क्षतिपूर्ति भत्ता 500/- रूपये एक ही बारमें दिए जाते हैं।
पी. के. डी. एल. रोगी को इलाज के दौरान क्षतिपूर्ति भत्ता 2000/- रूपये एक ही बार में दिए जाते हैं।
सहिया को 100/-रूपये प्रत्येक छिड़काव चक्र के लिए दिए जाते हैं। इस प्रकार छिड़काव कार्य के लिए कुल 200/-रूपये दिए जाते अहिं।
कालाजार के संभावित मरीजों को चिकित्सा के पास ले जाने एवं कालाजार पृष्टि के पश्चात रोगी का पूर्ण उपचार कराने पर सहिया को 300/रूपये प्रति रोगी दिए जाते हैं।
कालाजार नियत्रंक हेतु सहिया द्वारा गाँव में लोगों को बताया जाना चाहिए कि :
कालाजार से कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है, लेकिन आवश्यक सावधानियां अपनाकर कालाजार से बचा जा सकता है।
कालाजार से बचाव के लिए बालू मक्खी से बचना आवश्यक है।
घर के सभी कमरों की भीतरी दीवारों तथा बथानों में कीटनाशक का छिड़काव कराने से बालू मक्खी मर जाती है।
अगर आपके गाँव में कालाजार के लक्षण वाले एक भी रोगी है, तो इसकी सूचना सहिया या स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता को दें।
याद रखें

कालाजार की जांच और उपचार सरकार के सभी सदर अस्पताल और चुने हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त उपलब्ध है।

Tuesday, November 12, 2019

मित्रो मैं हूँ सुमन कुमार आपका दोस्त मैं आपका ज्यादा  समय नही लूंगा बस 2 मिनट please
 HELP THE HELPLESS MAN के नाम से you tube चैनल चला रहा हूँ जिसमें आप सबो का help चाहिये इस चैनल को आप सबो का ढेरो प्यार चाहिए ऐसा आप सबो से अपेक्षा करता हूं चैनल को subscribe और like कर के मेरे हौसलों को बुलंद करें ताकि मेरा जो मिसन है उसमे कामयाब हो सकू यदि आप चाहते है कि मैं रोज आपके लिए नई नई वीडियो लाते रहूं जिससे आपके जीवन में  ऊर्जा का स्रोत बनेगा तो bell का बटन को जरूर दबाये जिससे मेरा हर वीडियो आपको सबसे पहले मिलता रहेगा।याद से मित्रो subscribe= like= bell का बटन। हो सके तो share भी कर दे अपने अपने ग्रुप में।
 इग्नोर मत करना दोस्तो यदि 2 मिनट का भी समय अपने दोस्त के लिए नही है तो कोई बात नही।
Helping one another is the only true friendship
ok  मित्रो स्वस्थ रहे मस्त रहे ।
My channel name
HELP THE HELPLESS MAN
https://youtu.be/fFDTfEUHd_E

Sunday, November 10, 2019

इंसान

घर से जब निकले थे मेरे भी कुछ अरमान थे,
घर से जब निकले थे मेरे भी कुछ अरमान थे,
एक तरफ श्मसान तो दूसरी ओर कब्रिस्तान थे,
घर से जब निकले थे मेरे भी कुछ अरमान थे,
एक तरफ श्मसान तो दूसरी ओर कब्रिस्तान थे,
श्मसान में पड़ी हड्डियां पे
पड़े जब मेरे पैर 
तो उसके भी कुछ बयान थे,
की अय इन्सान जरा संभल कर
गुजरा कर,
की अय इन्सान जरा संभल कर
गुजरा कर,
क्योंकि हम भी कभी इंसान थे।।

पल दो पल

पल दो पल की ये मिलन
पल दो पल की ये मिलन
मोहब्बत क्यो बन जाती है।
न जान न पहचान किसी
किसी की दुल्हन 
क्यो बन जाती है।।

अनसुलझे रहस्य

मित्रो आज मैं जो आपसे कहने जा रहा हूँ
ये मेरे जीवन की एक विचित्र पहेली है।
जो आज तक मुझे कभी समझ मे नही आया
यदि आपको समझ मे आये तो कॉमेंट जरूर कीजियेगा,
मित्रों ये घटना 2001 की है वैसे मेरे जीवन मे दो तीन
घटना ऐसी घटी है जिसे मैं कभी भी भूल नही सकता
आगे कभी मैं इसका जिक्र करूँगा लेकिन जिस घटना
की मैं आपसे बात करने जा रहा हूँ ये उस समय की है जब मैं मैट्रिक की परीक्षा पास करके आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज में एडमिशन लिया था।वही कॉलेज में मेरी दोस्ती जितेंद्र नाम के लड़के से हो जाती है। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कभी वो मेरे घर पे आता तो कभी कभी मैं भी उनके घर पे चला जाता था हम दोनों की दोस्ती के बजह से घरेलू सम्बन्ध भी अच्छी हो गई थी,एक दिन की बात है मेरे दोस्त ने मेरे मम्मी पापा को अपने यहाँ घूमने को बुला लिया मेरे पैरेंट्स ने भी कह दिया ठीक है आज शाम को हम लोग तुम्हारे यहाँ आएंगे शाम होते ही हमारे पेरेंट्स मित्र के यहाँ जाने के लिए तैयार हो गए और मुझे भी साथ मे जाने को कहा तैयार होकर मैं भी अपने पेरन्ट्स के साथ अपने मित्र के यहां चल दिया ।उनके यहां जाने के बाद औपचारिकता जो होती है उसने हम लोगो को चाय वगेरह दिया और फिर हमारे मित्र के पेरेंट्स के साथ गप सप में मेरे पेरेंट्स मसगुल हो गए ।और मैं भी पास में चेयर लगा के बैठा था और मैं जहा बैठा था वही पास में एक बड़ा सा आम का पेड़ भी था मैं बहुत ही शालीनता से शांति से अपने चेयर पे चुप चाप उनलोगों की बातों को सुन रहा था कि तभी मेरे साथ एक विचित्र घटना घटता है होता यूं है कि मेरे कान एक आवाज सुनाई पड़ता वो भी बहुत धीमी आवाज ऐसा लगा जैसे मेरे पास आ कर किसी ने कान में धीरे से मेरा नाम लेकर कहता है  सु म न बस इतना सुनते ही मेरे शरीर का रोम रोम डर से खड़ा हो जाता है और थोड़ा देर के लिए मेरा शरीर ठंडा पड़ जाता है फिर जस्ट इसी बीच एक ओर बात होता है कि एक साँप मेरे पैर पे से गुजर जाता है आप अंदाजा लगाए की मेरे ऊपर किया गुजरा होगा जैसे ही साँप मेरे पैर से क्रोस करता है मैं चिल्ला के उठता हु सभी का ध्यान मेरे ओर जाता है जब मैंने कहा कि सांप मेरे पैर से होके गुजरा है तभी उनलोगों ने टॉर्च जला के देखा तो तो सांप अपने गति से जा रहा है ।मित्रो ऐसा अक्सर किसी के साथ घटना घट जाता है लेकिन इससे भी बिचित्र बात ये है कि मेरे कान में किसी का फुसफुसा के बोलना ये बात आज तक मेरी समझ मे नही आया आखिर ऐसा कैसे हो सकता है।आखिर ये कैसा संजोग था उस घटना को जब आज भी याद करता हु तो मैं सहम जाता है मेरे समझ से परे है ।दोस्तो ये मेरे जीवन की ऐसी घटना है जिसे मैं कभी भूल नही सकता। मित्रो यदि आपको मेरी आपबीती कहानी अच्छी लगी हो तो कॉमेंट जरूर कीजियेगा।धन्यवाद

डेंगू अवेर्नेस एवम सर्च प्रोग्राम


डेंगू मच्‍छर वर्षा ऋतु के दौरान बहुतायत से पाये जाते हैं। यह मच्‍छर प्रायः घरों स्‍कूलों और अन्‍य भवनों में तथा इनके आस-पास एकत्रित खुले एवं साफ पानी में अण्‍डे देते हैं। इनके शरीर पर सफेद और काली पट्टी होती है इसलिए इनको टाइग्‍र (चीता मच्‍छर) भी कहते हैं। यह मच्‍छर निडर होता है और ज्‍यादातर दिन के समय ही काटता है। डेंगू एक विषाणुसे होने वाली बीमारी है जो एडीज एजिप्‍टी नामक संक्रमित मादा मच्‍छर के काटने से फेलती है। डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है।

डेंगू बुखार के प्रकार

डेंगू बुखार का रोगी तीन प्रकार की अवस्‍थाओं से ग्रसित हो सकता है।

साधारण डेंगू

इसके मरीज का 2 से 7 दिवस तक तेज बुखार चढता है एवं इसके साथ निम्‍न में से दो या अधिक लक्षण भी साथ में होते हैं।
  • अचानक तेज बुखार।
  • सिर में आगे की और तेज दर्द।
  • आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने  से दर्द में और तेजी।
  • मांसपेशियों (बदन) व जोडों में दर्द।
  • स्‍वाद का पता न चलना व भूख न लगना।
  • छाती और ऊपरी अंगो पर खसरे जैसे दानें
  • चक्‍कर आना।
  • जी घबराना उल्‍टी आना।
  • शरीर पर खून के चकते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी।
  • बच्‍चों में डेंगू बुखार के लक्षण बडों की तुलना में हल्‍के होते हैं।

रक्‍त स्‍त्राव वाला डेंगू (डेंगू हमरेजिक बुखार)

खून बहने वाले डेंगू बुखार के लक्षण और आघात रक्‍त स्‍त्राव वाला डेंगू में पाये जाने वाले लक्षणों के अतिरिक्‍त निम्‍न लक्षण पाये जाते हैं।
  • शरीर की चमडी पीली तथा ठन्‍डी पड जाना।
  • नाक, मुंह और मसूडों से खून बहना।
  • प्‍लेटलेट कोशिकाओं की संख्‍या 1,00,000 या इससें कम हो जाना।
  • फेंफडों एवं पेट में पानी इकट्ठा हो जाना।
  • चमडी में घाव पड जाना।
  • बैचेनी रहना व लगातार कराहना।
  • प्‍यास ज्‍यादा लगना (गला सूख जाना)।
  • खून वाली या बिना खून वाली उल्‍टी आना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।

डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम

ऊपर दिये गये लक्षणों के अलावा अगर मरीज में परिसंचारी खराबी के लक्षण जैसेः-
  • नब्‍ज का कमजोर होना व तेजी से चलना।
  • रक्‍तचाप का कम हो जाना व त्‍वचा का ठ्न्‍डा पड जाना।
  • मरीज को बहुत अधिक बेचैनी महसुस करना।
  • पेट में तेज व लगातार दर्द।
  • ऊपर की तीन स्थितियों के अनुसार मरीज का यथोचित उपचार प्रारम्‍भ करें।
  • मरीज के खून की सीरोलोजिकल एवं वायलोजिकल परीक्षण केवल रोग को सुनिश्चित करती है तथा इनका होना या ना होना मरीज के उपचार में कोई प्रभाव नहीं डालता क्‍योंकि डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है, इसके लिये कोई खास दवा या वैक्‍सीन उपलब्‍ध नहीं है।






डेंगू बुखार से बचाव के उपाय

  • छोटे डिब्‍बो व ऐसे स्‍थानो से पानी निकाले जहॉं पानी बराबर भरा रहता है।
  • कूलरों का पानी सप्‍ताह में एक बार अवश्‍य बदले।
  • घर में कीट नाशक दवायें छिडके।
  • बच्‍चों को ऐसे कपडे पहनाये जिससे उनके हाथ पांव पूरी तरह से ढके रहे।
  • सोते समय मच्‍छरदानी का प्रयोग करें।
  • मच्‍छर भगाने वाली दवाईयों/ वस्‍तुओं का प्रयोग करें।
  • टंकियों तथा बर्तनों को ढककर रखें।
  • सरकार के स्‍तर पर किये जाने वाले कीटनाशक छिडकाव में सहयोग करें।
  • आवश्‍यकता होने पर जले हूये तेल या मिट्टी के तेल को नालियों में तथा इक्कट्ठे हुये पानी पर डाले।
  • रोगी को उपचार हेतु तुरन्‍त निकट के अस्‍पताल व स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में ले जाएँ ।

डेंगू बुखार की रोकथाम हेतु निम्‍न कार्यवाही करें

  • रोगी की रोकथाम हेतु सर्वे, जांच, उपचार तथा रोकथाम की कार्यवाही रोगियों के निवास के 5 किमी के दायरे में करवाएं।
  • क्षेत्र से सम्‍बन्धित नगर निगम/ नगरपालिका के स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर रोग की रोकथाम हेतु चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग तथा नगर निगम के कर्मचारियों का संयुक्‍त दल बनाकर एन्‍टी लार्वा कार्यवाही करा सुनिश्चित करें।
  • जिले में पानी एकत्रित होने वाले सभी स्‍थानों (जहां पर मच्‍छर प्रजनन की सम्‍भावना है) पर एन्‍टी लार्वा की कार्यवाही की जाएँ ।
  • प्रचार-प्रसार द्वारा आम लोगो को रोग से बचाव तथा मच्‍छरों के प्रजनन स्‍थानों पर एन्‍टी लार्वा कार्यवाही के सम्‍बन्‍ध में विस्‍तृत  जानकारी प्रदान की जाएँ ।